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4 हजार रुपये में ठेके पर दी पंचायत की 72 बीघा जमीन, ग्रामीणों ने की ठेका निरस्त करने की मांग
Uttarakhand Herald

रुडक़ी। केवलपुरी ग्रामसभा की 72 बीघा जमीन का मात्र साढ़े चार हजार रुपये सालाना में मत्स्य पालन के लिए ठेके पर दिए जाने से नाराज लोगों ने एसडीएम से मिलकर शिकायत की। उन्होंने कहा कि उक्त जमीन की वैल्यू प्रतिवर्ष दो लाख रुपये सालाना से भी ज्यादा की है। ग्रामीणों ने ठेका निरस्त करने की मांग की है।

      निरंजनपुर ग्रामसभा के पूर्व उप प्रधान सुनील चौहान के साथ धर्मसिंह, मोहनलाल, योगेश कुमार, ज्ञानचंद, महावीर सिंह, विपिन, विनोद, मुकेश, लखीराम, विनोद, दयाल सिंह, रोहताश आदि ने एसडीएम शैलेंद्र सिंह नेगी से मुलाकात की। उन्होंने एसडीएम को बताया कि उनकी पंचायत के केवलपुरी गांव में चंदाताल के नाम से करीब 72 बीघा सरकारी भूमि है। पूर्व में इस जमीन पर कुछ लोग अवैध रूप से कब्जा कर खेती कर रहे थे। 2018 में हाईकोर्ट के आदेश पर प्रशासन ने यह भूमि खाली करा दी थी।

     बताया कि इसके बाद मिलीभगत करके महज चार हजार रुपये सालाना के किराए पर उक्त 72 बीघा जमीन को तालाब खोदकर मछली पालन के लिए आवंटित कर दिया गया है। बताया कि इस समय खेती की एक बीघा जमीन का सालाना किराया ही चार हजार रुपये है। इस लिहाज से जमीन का पट्टा निरस्त कर नए सिरे से नीलामी कराई जानी चाहिए। ग्रामीणों का यह भी कहना था कि यदि प्रशासन चाहे तो वे उक्त जमीन को डेढ़ लाख रुपये सालाना के किराए पर लेने को तैयार हैं।

     एसडीएम का कहना था कि आवंटन मछली पालन के लिए हुआ है। उन्होंने मामले की जांच कराकर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

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