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मुनस्यारी के आपदा प्रभावित पानी को तरसे
Uttarakhand Herald

पिथौरागढ़। बारिश के बाद भी मुनस्यारी के आपदा प्रभावित पानी को तरस गए हैं। पेयजल लाइनें ध्वस्त होने से 15 से अधिक गांवों में पेयजल आपूर्ति ठप है, जिससे क्षेत्र की 8 हजार की आबादी परेशान है। प्रभावित गधेरों के दूषित पानी से अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं। आसमानी आफत के साथ ही सरकारी मशीनरी की सुस्ती आपदा प्रभावितों पर भारी पड़ रही है। सीमांत जनपद में आपदा प्रभावितों को राहत पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं।

      बावजूद इसके इसका असर धरातल पर नहीं दिख रहा। पीने के शुद्ध पानी को तरसे मुनस्यारी के आपदा प्रभावित इसका प्रमाण हैं। यहां के मालोपाती, धापा, मटेना, चौना, जैती, बुंगा, घोरपट्टा, मदकोट सहित 15 से अधिक गांवों में पेयजल आपूर्ति ठप है, जिससे यहां की 8 हजार से अधिक की आबादी को परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोग बारिश और बदहाल रास्तों के बीच गधेरों से दूषित पानी ढोकर अपनी जरूरत पूरी कर रहे हैं। भूस्खलन से पेयजल लाइनें ध्वस्त हो गई हैं, जिससे नलों में पानी की बूंद नहीं टपक रही। बावजूद इसके पेयजल लाइनों को ठीक करने के प्रयास नहीं किए जा रहे।

खुद ही पेयजल लाइनों को ठीक करने में जुटे हैं आपदा प्रभावित
मुनस्यारी। क्षेत्र के विभिन्न गांवों में भूस्खलन से अधिकतर पेयजल योजनाओं ने जवाब दे दिया है। जगह-जगह पानी की लाइनें टूट गई हैं, जिन्हें ठीक करने में विभाग तत्परता नहीं दिखा रहा। लंबे समय बाद भी सरकारी मशीनरी से राहत न मिलने पर आपदा प्रभावित खुद ही पेयजल लाइनों को ठीक करने में जुटे हैं। गांव के युवक हाथों में फावड़ा, बेल्चा थामकर योजनाओं को ठीक कर रहे हैं। ताकि उनके गांव वालों को बारिश के बीच जान जोखिम में डालकर गाड़-गधरों की दौड़ न लगानी पड़े। चौना की प्रधान हीरा देवी, मटेना की प्रधान हेमा देवी ने कहा जल्द पेयजल योजनाओं को ठीक नहीं किया गया तो वे ग्रामीणों को साथ लेकर आंदोलन करेंगी।
अवधेश कुमार, ईई, जल संस्थान, डीडीहाट का कहना है कि भूस्खलन से पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिन्हें ठीक किया जा रहा है। टीम लगातार क्षेत्र में बनी हुई है। जल्द पेयजल आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।

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