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नए भूमि बंदोबस्त के साथ मूल निवास को भी फिर से लागू करने की मांग
Uttarakhand Herald

पौड़ी। उत्तराखंड में नए भू-कानून बनाए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे भू-कानून अभियान का समर्थन करते हुए कांग्रेस पार्टी के एआईसीसी के सदस्य राजपाल बिष्ट ने भी प्रदेश में एक मजबूत भू-कानून की आवश्यकता बताते हुए प्रदेश में नया भूमि बंदोबस्त किए जाने के साथ ही मूल निवास प्रमाण पत्र भी लागू करने की मांग उठाई है।

      अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य राजपाल बिष्ट ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की संकल्पना के मूल में पहाड़ी क्षेत्रों के जल, जंगल व जमीन पर यहां के मूल निवासियों के हक-हकूक सुरक्षित रखे जाने की थी। उत्तर प्रदेश में रहते हुए इस पहाड़ी क्षेत्र में बाहरी लोगों को भूमि खरीद में अधिकत्तम 500 वर्ग मीटर की छूट थी। प्रदेश बनने के बाद इसे संशोधित कर यह सीमा घटाकर 250 वर्ग मीटर की गई थी। लेकिन वर्तमान प्रदेश सरकार ने साल 2018-19 में बाहरी लोगों को यहां भूमि खरीद में सारी पाबंदियों को हटाकर मूल निवासियों के हक-हकूकों के हकों को खत्म करने का काम किया।

       कहा कि सरकार भू-माफियाओ को बढ़ावा देकर प्रदेश की संस्कृति व पहचान को नष्ट करने का काम कर रही है। कहा कि हिमाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम सहित कई पर्वतीय राज्यों में मजबूत भू-कानून हैं। इन प्रदेशों में बाहरी लोगों के भूमि खरीद पर पूरी तरह से पांबदी है। प्रदेश में भी धारा 371 लागू किए जाने की आवश्यकता है। कहा कि प्रदेश में साल 1962 के बाद से आज तक कोई भूमि बंदोबस्त नहीं हुआ है। जिसका खामियाजा यहां के मूल निवासियों को झेलना पड़ रहा है। उन्होंने प्रदेश में नया भूमि बंदोबस्त किए जाने के साथ ही प्रदेश में खत्म किए गए मूल निवास को फिर से लागू करने की मांग उठाई है।

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