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प्रधानाध्यापकों की वर्चुअल बैठक में पदोन्नति शुरु करने की मांग
Uttarakhand Herald

विकासनगर। राजकीय हाईस्कूलों में तैनात प्रधानाध्यापकों ने पिछले पांच साल से पदोन्नति पर अघोषित रोक लगाए जाने को लेकर नाराजगी जाहिर की है। सोमवार को पछुवादून, जौनसार बावर के हाईस्कूलों में तैनात प्रधानाध्यापकों ने वर्चुअल बैठक कर सरकार से जल्द पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।  

      बैठक में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक आरपी अग्रवाल ने कहा कि पिछले पांच साल से प्रदेश में प्रधानाचार्य पदों पर पदोन्नति नहीं हुई है, जबकि पूरे प्रदेश प्रधानाचार्यों के 1007 पद रिक्त हैं। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में पदोन्नति पाए बिना ही करीब सत्तर प्रधानाध्यापक सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि पदोन्नति प्रत्येक कर्मचारी का मौलिक अधिकार है, जिससे उसे वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।

     सहसपुर ब्लॉक में तैनात प्रधानाध्यापक सुनील जोशी ने कहा कि प्रधानाध्यापक से प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति में शिथिलता दिए जाने के लिए पिछले एक साल से पत्रावलियां शासन स्तर पर गतिमान हैं। कार्मिक, वित्त और न्याय विभाग से इसके लिए संस्तुति भी मिल चुकी है। बावजूद इसके उन्हें पदोन्नति से अभी तक वंचित रखा जा रहा है। हाईस्कूल रुद्रपुर के प्रधानाध्यापक एसपी खंडूड़ी ने कहा कि इससे पूर्व मात्र छह माह का कार्यकाल पूर्ण होने पर प्रधानाध्यापकों को प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति दी गई है। जबकि कुछ प्रधानाध्यापकों को ढ़ाई साल के कार्यकाल के बाद पदोन्नत किया गया। लेकिन इस बार सरकार ने पात्रता पूरी करने के बावजूद पांच साल से प्रधानाध्यापकों की पदोन्नति पर अघोषित रोक लगाई हुई है। पदोन्नति पात्रता रखने वाले कई प्रधानाध्यापक सेवानिवृत्त हो चुके है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी हुआ है।

     उन्होंने कहा कि लंबी सेवा के बाद पदोन्नति से वंचित रखना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। सभी प्रधानाध्यापकों ने जल्द पदोन्नति प्रक्रिया शुरु करने की मांग की है। बैठक में दिनेश चंद्र त्रिपाठी, जगदंबा प्रसाद गैरोला, यशवंत बर्थ्वाल, सुदर्शन प्रसाद खंडूड़ी, डी त्रिपाठी, राजेंद्र प्रसाद आदि मौजूद रहे।

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