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जिला अस्पताल के पीपीपी मोड में जाने की फिर चर्चाएं तेज
Uttarakhand Herald

बागेश्वर। जिला अस्पताल बागेश्वर के एक बार फिर पीपीपी मोड में जाने की सुगबुगाहट फिर से तेज हो गई है। अस्पताल में चल रहे कुछ बदलाव इसकी वजह बताई जा रही है। अस्पताल में कुछ डॉक्टर व स्टाफ एक प्राइवेट कंपनी से आने की चर्चाएं तेज हैं। अस्पताल में हो रहे कंस्ट्रक्शन और लगातार प्राइवेट कंपनी के स्टाफ के आने से चर्चाओं को बल मिल रहा है। स्थानीय लोगों ने इसे जिले का दुर्भाग्य बता रहे हैं।

      जिला अस्पताल को पीपीपी मोड में जाने की खबर पिछले साल से चली आ रही है। जब से जिला अस्पताल मे एक प्राइवेट कंपनी के द्वारा डॉक्टर को भेजा गया, तब से स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी छाने लगी है। बागेश्वर जिला अस्पताल बागेश्वर के अलावा पिथौरागढ़, चमोली जिले के सीमावर्ती लोगों के लिए भी एकमात्र सहारा है। इसी बीच दो महीनों के अंदर टीएलएम कम्पनी से दो फिजियोथेरेपिस्ट, एक आई सर्जन, एक हड्डी रोग विशेषज्ञ, एक ग्यानोकॉलोजिस्ट, एक  एनीस्थिशियन, एक जरनल सर्जन, एक ईएनटी,  दस स्टाफ नर्स,  एक मेटर्न स्टाफ के आने के बाद से लोगों मे शासन के प्रति रोष व्याप्त होने लगा है। 

      दीपक खेतवाल, सामाजिक कार्यकर्ता का कहना है कि बागेश्वर जिला अस्पताल अभी के वक्त करीब दो सालों से सबसे बेहतर कार्य कर रहा है। यहां डॉक्टर काफी हैं, जितना जिला अस्पताल को जरूरत है। उस हिसाब से यहां लगातार स्टाफ भेजना पूरी तरह सरकार की मनसा पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल पीपीपी मोड में गया तो जिले का दुर्भाग्य शुरू होगा। कपकोट अस्पताल के पीपीपी मोड पर जाने पर बुरे हाल हो गए और लोगों को आंदोलन तक करना पड़ा था। अगर जिला अस्पताल पीपीपी मोड में गया तो वो आंदोलन करने को बाध्य होंगे।  

      हरीश ऐठानी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बागेश्वर ने कहा कि भाजपा हमेशा निजीकरण के पक्ष में रही है। जिला अस्पताल का पीपीपी मोड में जाना सरकार की नाकामी और तंत्र का फेलियर है। जिला अस्पताल आज के वक्त मे कई सालों बाद बेहतरीन सेवा दे रहा है। अस्पताल में डॉक्टरों की तादाद, सीटी स्कैन, एमआरआई मशीन तक आने वाली है।
 
चंदन राम दास, विधायक बागेश्वर का कहना है कि जिले में कई डॉक्टरों की तैनाती इस बार एनआरएचएम के तहत हो रही है। इससे लोगों में भ्रांति है। पीपीपी मोड में अस्पताल सफल नहीं हैं। पूर्व में कपकोट समेत कई अस्पताल पीपीपी मोड में दिए गए। बाद में उन्हें सरकार को वापस लेना पड़ा। जिला अस्पताल पीपीपी मोड में नहीं जा रहा है।  

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