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डीएम ने लगाई लेप्रोसी मिशन की जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक
Uttarakhand Herald

अल्मोड़ा। नगर के प्रवेश द्वार करबला में  ‘द लैप्रोसी मिशन’ हॉस्पिटल एवं होम की जमीन की खरीद फरोख्त पर डीएम नितिन भदौरिया ने रोक लगा दी है। डीएम ने इस मामले की जांच के आदेश भी दिए हैं। एसडीएम सदर सीमा विश्वकर्मा को यह जांच सौंपी गई है।

       डीएम ने कहा है कि जांच पूरी होने पर यह पाबंदी लागू रहेगी। करबला के इस अस्पताल का ताल्लुक दरअसल कुष्ठ रोगियों से रहा है। 1837 में तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर सर हेनरी रैमजे ने कुष्ठ रोगियों के लिए इस अस्पताल की स्थापना करवाई थी। बताया जाता है कि माल गांव के लोगों की यह जमीन अस्पताल के संचालन के लिए ली गई थी। आजादी के समय तक अमेरिकन मैथोडिस्ट मिशन के तहत इसका संचालन होता था। देश के आजाद होने के बाद इस मिशन ने यहां काम काज समेट लिया।  इसके बाद से मैथोडिस्ट चर्च ऑफ इंडिया नार्थ रीजन जोन बरेली ने इस पर स्वामित्व बताया जा रहा है, हालांकि लेप्रोसी ट्रस्ट ऑफ इंडिया यहां अस्पताल का संचालन कर रहा था। 2019 में उनकी लीज समाप्त हो गई और संस्था ने अपना काम काज समेट लिया है। वर्तमान में यहां कोई अस्पताल नहीं चल रहा है, हालांकि एक दर्जन से अधिक कुष्ठ रोगी अभी आश्रम में रह रहे हैं।

      इधर, प्रशासन के स्तर से इस स्थान पर कोविड अस्पताल बनाने के प्रस्ताव पर विचार किया गया था। इस पर कुछ लोगों की ओर से आपत्ति व्यक्त की गई थी। डीएम की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि वर्तमान तक इस  संस्था की भूमि और भवन आदि पर प्रत्यक्ष रूप से किसी प्रकार की अनियमितता होना प्रकाश में नहीं आया है, लेकिन मैथोडिस्ट चर्च ऑफ इंडिया इस संस्थान और भूमि को किसी अन्य प्रयोजन के लिए क्रय विक्रय करने की स्थिति में जनता से विरोध की संभावना है। इसको देखते हुए डीएम नितिन भदौरिया ने उप जिलाधिकारी सदर को जांच के आदेश दिए हैं। जांच रिपोर्ट आने तक सबंधित भूमि की खरीद फरोख्त को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है। जिला मुख्यालय के प्राइम लोकेशन की इस जमीन पर बिल्डरों की नजर बनी थी।

      जानकारी के अनुसार संबंधित ट्रस्ट की ओर से इस जमीन को बेचने की अंदरखाने कवायद चल रही है। यहां तक कि इसके लिए अग्रिम भुगतान भी हासिल कर लिया गया है, हालांकि इस बारे में किसी भी स्तर से पुष्ट जानकारी नहीं मिली है। लोगों का यह भी आरोप है कि वहां रह रहे रोगियों की देखभाल भी पहले की तरह नहीं हो रही है। 

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