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भोजन माताओं को मिली नई जिम्मेदारी
Uttarakhand Herald

बागेश्वर। जिले की भोजन माताओं को विभाग ने अब खाना बनाने के अलावा नई जिम्मेदारी दी है। कोरोना के चलते विद्यालय बंद होने के कारण यह निर्णय लिया गया है। भोजन माताएं अब विद्यालयों में किचन गार्डन तैयार कर उसमें सब्जी आदि का उत्पादन करेंगी। इसके लिए उन्हें नियमित विद्यालय जाना होगा। जो माताएं ऐसा नहीं करेंगी उन्हें मानदेय लेने में परेशानी हो सकती है।  मालूम हो कि प्राथमिक कक्षाओं से लेकर कक्षा आठ तक के बच्चों को स्कूल में मध्याह्न भोजन दिया जाता है। कोरोना के चलते विद्यालय लंबे समय से बंद हैं। आठ तक पढऩे वाले बच्चों को मिड-डे मील की राशि और चावल दिया जा रहा है। इस कारण भोजन माताएं भोजन नहीं बना रही हैं।

    अब विभाग पोषण किचन गार्डन तैयार करेगा। कई विद्यालय में इस तरह का प्रयास हो रहा है, लेकिन अब हर विद्यालय में इसे तैयार किया जाएगा। विद्यालय में मध्याह्न भोजन नहीं बन रहा है, जबकि भोजन माताओं को नियमित मानदेय दिया जा रहा है। पहले विभाग ने शिक्षकों को 12 जुलाई से स्कूल में उपस्थित होकर ऑनलाइन पढ़ाने के निर्देश  दिए थे। साथ ही भोजन माताओं केा मध्याह्न योजना के अंतर्गत खाद्य सुरक्षा भत्ता भी उपलब्ध कराया जा रहा है। खाना नहीं बनने के कारण अब भोजन माताओं को नई जिम्मेदारी दी जा रही है। 

    1076 भोजन माताएं हैं जिले में कार्यरत:  प्राथमिक, जूनियर हाइस्कूल तथा इंटर कॉलेज में मध्याह्न भोजन बनाता है। इसके लिए जिले में 1076 भोजन माताएं तैनात की हैं। इन पर कक्षा एक से आठ तक बच्चों के लिए भोजन बनाने की जिम्मेदारी है। मीनू के अनुसार ही भोजन तैयार किया जाता है। अब नई जिम्मेदारी कैसे निभाती है यह सब समय आने पर ही पता चल पाएगा। 

ये काम करेंगी भोजनमाताएं
1. खाद्य सुरक्षा भत्ता वितरण करने में सहयोग
2. समय-समय पर किचन कम स्टोर, किचन उपकरण एवं किचन परिसर की सफाई
3. विद्यालय में किचन गार्डन तैयार कर उसमें पौष्टिक सब्जी उत्पन्न करना। 

    पदमेंद्र सकलानी, मुख्य शिक्षा अधिकारी, बागेश्वर ने बताया कि जिले की सभी भोजन माताओं को जो जिम्मेदारी दी है उसका पालन करने के लिए सभी उपशिक्षा अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं। कोरोना के चलते विद्यालय बंद होने के कारण यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें नियमित मानदेय भी मिल रहा है।

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