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संस्कृत मास महोत्सव के उद्देश्य की दी जानकारी
Uttarakhand Herald

पौड़ी। उत्तराखण्ड संस्कृत अकाडमी द्वारा ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया। उत्तराखण्ड संस्कृत अकाडमी के शोधाधिकारी हरीश चन्द्र गुरुरानी ने संस्कृत मास महोत्सव के उद्देश्य, लोककल्याण और संस्कृत प्रसार के बारे में बताया। कार्यशाला में लालबहादुर शास्त्री विश्वविद्यालय के वास्तुविभाग में सहायक आचार्य डा. प्रवेश व्यास ने शास्त्र को समझने के लिये संस्कृतभाषा का अध्ययन करने का महत्व बताया।

       मुख्य वक्ता अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डा. मनोज कुमार जुयाल ने वायुशुद्धि के लिये पौधरोपण के महत्व को बताते हुए कहा कि पौधे वास्तु दोष को दूर करने में सहायक होते हैं। औषधीय गुणों से युक्त पौधों को भी उचित स्थान पर लगाने से अनेकों समस्यायें दूर हो जाती हैं।

      सहवक्ता लालबहादुर शास्त्री केन्द्रिय विश्वविद्यालय के वास्तु विभागाध्यक्ष प्राचार्य प्रो. अशोक थपलियाल ने वास्तु पद विन्यास की प्रक्रिया के बारे में बताया। कहा कि सभी प्राणी सुखप्राप्ति चाहते हैं। भोजन प्राप्त करके मानव के लिए आवास का स्थान सब से आवश्यक है। घर हमको तीव्रधूप, बारिश और तूफ़ान से सुरक्षित करता है। वास्तुशास्त्र न केवल मनुष्य का हित के लिये लिखा गया अपितु जीव, जन्तु, पक्षि, और समस्त वनस्पतियों के हित के लिये भी है ।

     महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के ज्योतिषाचार्य डा. नवीन शर्मा ने भूमिशुद्धि की प्रक्रिया बताई। मुख्य अतिथि संस्कृत शिक्षा उपनिदेशक डा. वाजश्रवा आर्य ने भी कई जानकारी दी। इस मौके पर ऋषि राम कृष्णमहाराज, डा. किशोरी लाल रतूडी, डा. चन्द्र प्रकाश उप्रेती, डा. शक्ति प्रसाद उनियाल, आचार्य रोशन लाल गौड, राकेश कंडवाल, कुलदीप मैंदोला आदि शामिल थे।

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