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नन्दा मय हुआ हिमालय, बुग्यालों में होगी पूजा-अर्चना
नन्दा मय हुआ हिमालय, बुग्यालों में होगी पूजा-अर्चना

चमोली। हिमालय की आराध्य देवी मां नन्दा की हर वर्ष होने वाली नन्दा जात की आस्था से चमोली का हिमालयी क्षेत्र श्रद्धा और विश्वास में सराबोर है। अलग-अलग स्थानों से मां नन्दा की डोली, छंतोलियां, नौ निशाण हजारों फिट की ऊंचाई वाले बुग्यालों में सम्पन्न होने वाली नन्दा जात पूजा अर्चना के लिये अब उच्च हिमालयी क्षेत्र में पहुंच गयीं हैं ।

      मां नन्दा राज राजेश्वरी की सजी संवरी डोली अपने नौ निशाणों के साथ अर्चकों , श्रद्धालुओं के साथ उनके कंधों पर स्नेह के साथ सवार होकर सोमवार को वेदनी बुग्याल में पहुंचेंगी। यहा़ आस्था के साथ लोक जात सम्पन होगी। मां नन्दा के सिद्धपीठ कुरुड़ की नन्दा देवी भी हिमालयी बुग्याल बालपाटा पहुंचेगी। यहां पर नन्दा लोकजात पूर्ण आस्था के साथ सम्पन्न होगी। मां नन्दा के पुजारी पं मुन्शी राम गौड़ ने बताया हर वर्ष आयोजित होने वाली मां नन्दा की जात यात्रा को लेकर आस्था और समर्पण हर पल दिख रहा है। बंड की मां नन्दा की रिंगाल से बुनी और भोज पत्र से मढ़ी सुन्दर छंतोली सोमवार को नरेला बुग्याल पहुंचेगी । यहां पर मां नन्दा की हर वर्ष होने वाली जात यात्रा श्रद्धा के साथ सम्पन होगी।

      संस्कृति धर्मी संजय भंडारी बताते है़ मां नन्दा की जात यात्रा में छंतोली और आस्था के साथ श्रद्धालु हिमालयी बुग्यालों की ओर बढ़ रहे हैं। उर्गम घाटी में मां नन्दा स्वनूल भगवती की आस्था की यात्रा भी उच्च हिमालयी शिखर बुग्यालों में पहुंच गयी है। उर्गम घाटी के संस्कृति धर्मी रघुवीर सिंह नेगी ने बताया नंगे पैर , मन में आस्था और विश्वास के साथ मां की छंतोली नौ निशाण से साथ भक्त यात्रा में हैं।

बदरीनाथ में तीन दिवसीय नंदा अष्टमी मेला शुरू
      बदरीनाथ के बर्फ से ढके नीलकंठ की तलहटी पर फुलारी ब्रह्म कमल लेने नंगे पाव रवाना हो गये हैं। रविवार से बामणी गांव में तीन दिवसीय नंदा अष्टमी मेला शुरू हो गया है। मंदिर में भक्तों ने पूजा अर्चना व मां नंदा के जागर लगाए। यहां के सोमेश, मयंक भट्ट, प्रवेश मेहता, सार्थक भट्ट सहित 4 लोग फुलारी के रूप में नीलकंठ पर्वत की तलहटी पर ब्रह्म कमल लेने गए हैं। सोमवार को फुलारी रिंगाल की कंडियो में ब्रह्मकमल भर कर मा नंदा के मंदिर में लायेंगे। जिसके बाद सर्वप्रथम इन फूलों से मां नंदा का श्रृंगार किया जायेगा। यहां के बदरीलाल बताते हैं कि मान्यता है कि नीलकंठ हिमालय से आने वाले ब्रह्मकमल के अंदर भंवरे के रूप में मां नंदा निवास करती है।

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