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हमारी जीवन शैली ऐसी हो जिसमें हमारा स्वास्थ्य और हमारी प्रकृति दोनों एकदम स्वस्थ हो : स्वामी चिदानन्द सरस्वती
हमारी जीवन शैली ऐसी हो जिसमें हमारा स्वास्थ्य और हमारी प्रकृति दोनों एकदम स्वस्थ हो : स्वामी चिदानन्द सरस्वती 

ऋषिकेश। 1 सितम्बर से 7 सितंबर तक होने वाले राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के अवसर पर, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि कोरोना महामारी के इस दौर में वैश्विक स्तर पर सभी को अपने स्वास्थ्य और जीवन शैली के प्रति और जागरूक होना पड़ेगा।

     स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि एक स्वस्थ दिनचर्या के लिये योग, ध्यान, प्राणायाम के साथ ही पर्याप्त पोषण सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक है। कोविड-19 के इस दौर में हमारे शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र ही है जो हमारी सुरक्षा कर सकता है। एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली के निर्माण के लिए, संतुलित आहार और योग युक्त जीवन शैली अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। स्वामी जी ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिये जरूरी है स्वच्छ, पोषण और संतुलित आहार, तनाव मुक्त जीवनशैली, पर्याप्त नींद, प्रतिदिन योग और ध्यान तथा मानिसक रूप से स्वस्थ रहना और भी आवश्यक है। अपने प्रतिदिन के भोजन में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ आदि से युक्त संतुलित भोजन और पोषक तत्वों को शामिल  करना  जरूरी  है। तनाव युक्त जीवन से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है जिससे बीमारियां भी हो सकती हैं इसलिये योग और ध्यान के साथ स्वस्थ जीवन जियें, कोविड गाइडलाइन का पालन करें स्वस्थ रहें।

   स्वामी जी ने कहा कि हमारी जीवन शैली ऐसी हो जिसमें हमारा स्वास्थ्य और हमारी प्रकृति दोनों एकदम स्वस्थ हो जिससे सम्पूर्ण मानवता और हमारा ग्रह दोनों भी प्रफुल्लित रह सके। योग, ध्यान और संतुलित आहार ऐसे सशक्त माध्यम है जिससे मानसिक शान्ति और शक्ति मिलती हैं साथ ही एक सुखद स्मृति प्राप्त होती हैं। संतुलित आहार से हम ऊर्जावान महसूस करते है, मन प्रफुल्लित रहता है जिससे मस्तिष्क में सकारात्मक विचारों का संचार होता है, साथ ही इससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। स्वामी जी ने कहा कि जिस प्रकार स्वस्थ रहने के लिये डाइट प्लान होता है वैसे ही मानसिक स्वास्थ्य के लिये थाट प्लान भी जरूरी है। जब आप खुश होते हैं और सकारात्मक चिंतन करते हैं तो जीवन भी मुस्कुराने लगता है, शरीर में हार्मोन्स का बैलेन्स बना रहता है परन्तु जब आप दूसरों को खुश करते हैं तो जीवन आनन्द से भर जाता है, मन शांत होता है जिससे जीवन में आने वाली सभी समस्याओं का समाधान मिलने लगता है।

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