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पंजाब से आए संतों का निर्मल अखाड़े के संतों ने किया स्वागत
अखाड़े की परंपरांओं का पालन करते हुए राष्ट्र सेवा में योगदान करें संत : श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह

हरिद्वार। श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज ने कहा कि धर्म संस्कृति के उत्थान व राष्ट्र सेवा में संत समाज का हमेशा उल्लेखनीय योगदान रहा है। कनखल स्थित अखाड़े में पंजाब से आए निर्मल सम्प्रदाय के संतों का स्वागत करते हुए श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज ने कहा कि प्रसन्नता का विषय है कि गलत प्रचार से प्रभावित होकर कुछ समय के लिए अखाड़े से दूर हो गए संत वास्तविकता से अवगत होने पर अखाड़े में वापस आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल की महान विरासत रही है। अखाड़े के संतों ने हमेशा ही देश, धर्म व मानव सेवा में उल्लेखनीय योगदान दिया है। सभी संतों को एकजुट होकर अखाड़े की पंरपरांओं का पालन करते हुए राष्ट्र सेवा में योगदान करना चाहिए।

     कोठारी महंत जसविन्दर सिंह महाराज ने संतों का स्वागत करते हुए कहा कि कुछ लोगों ने षडय़ंत्र के तहत अखाड़े की महान गुरू परंपराओं को धूमिल करने का प्रयास किया। लेकिन उनके मंसूबे पूरे नहीं हुए। उन्होंने कहा कि सच को कभी झूठलाया नहीं जा सकता है। विरोधियों के दुष्प्रचार की वजह से भ्रमवश अखाड़े से अलग हुए संत सच्चाई उजागर होने के बाद निरंतर अखाड़े में वापस लौट रहे हैं।

    पंजाब से आए संतों ने निर्मल अखाड़े व अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह के प्रति आस्था व्यक्त करते हुए धर्मप्रचार करने का संकल्प लिया है। सभी संत एकजुट होकर धर्म सेवा व मानव कल्याण में योगदान करते हुए अखाड़े की परंपरांओं को मजबूत करेंगे।

  महंत बाबा देवेंद्र सिंह महाराज ने कहा कि अखाड़े के प्रति फैलाए जा रहे भ्रम से प्रभावित होकर अज्ञानतावश अखाड़े से अलग हुए संत भूल का अहसास होने पर वापस लौट आए हैं। सच्चाई का पता लगने पर सभी मतभेदों को भुलाते हुए सभी संत श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह के नेतृत्व में निर्मल अखाड़े की परंपरांओं के अनुरूप सनातन संस्कृति व धर्म प्रचार में योगदान करेंगे। उन्होंने कहा कि अखाड़े की छवि धूमिल करने के प्रयासों को कभी कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।

   अखाड़े में वापस लौटे संतों में महंत बाबा हरबेअंत सिंह, महंत सुखदेव सिंह सिधाना, महंत वाहेगुरू सिंह, महंत सतपाल सिंह, महंत भरपूर सिंह, महंत गौरा सिंह, भाई रघुवीर सिंह, भाई हरजिन्दर सिंह, बाबा गुलाब सिंह आदि शामिल रहे। महंत सुखजीत सिंह, महंत परमिन्दर सिंह, महंत अवतार सिंह, महंत हरदेव सिंह, बाबा जगमोहन सिंह, बाबा संदीप सिंह, संत सुखप्रीत सिंह, बाबा परमजीत सिंह धूरी, ज्ञानी बलविन्दर सिंह आदि ने भी सभी संतों का स्वागत किया।

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