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संस्कृत अकादमी की मुक्ति योजना पर रोक लगाने के लिए सीएम से मिला गंगा सभा का प्रतिनिधिमण्डल
संस्कृत अकादमी की मुक्ति योजना पर रोक लगाने के लिए सीएम से मिला गंगा सभा का प्रतिनिधिमण्डल

हरिद्वार। श्री गंगा सभा के प्रतिनिधि मण्डल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की मुक्ति योजना को रदद् करने की मांग की है। इस संबंध में प्रतिनिधिण्मडल ने एक ज्ञापन भी मुख्यमंत्री को दिया।

      मुख्यमंत्री धामी ने प्रतिनिधिमण्डल को संस्कृत अकादमी द्वारा प्रस्तावित अस्थिप्रवाह से सम्बंधित मुक्ति योजना को रद्द करने का आश्वासन दिया है। इस दौरान गंगा सभा अध्यक्ष प्रदीप झा ने कहा कि संस्कृत भाषा व संस्कृत शिक्षा के उत्थान के लिए गठित संस्कृत अकादमी अपने उद्देश्य से भटककर पुरोहितों द्वारा संपन्न कराए जाने वाले धार्मिक कर्मकाण्डों में हस्तक्षेप कर रही है। उन्होंने कहा कि सदियों से चली आ रही परंपरांओं का पालन करते हुए तीर्थ पुरोहित ही अपने यजमानों के अस्थि विसर्जन व अन्य धार्मिक कर्मकाण्ड संपन्न करा रहे हैं।

     हरिद्वार के तीर्थ पुरोहितों के पास उपलब्ध बहियों में यजमानों का पीढ़ी दर पीढ़ी पूरा ब्यौरा दर्ज है। धार्मिक कर्मकाण्ड कराने के लिए आने वाले यजमानों को सभी सुविधाएं भी पुरोहितों की और से उपलब्ध करायी जाती हैं। लेकिन संस्कृत अकादमी पुरोहितों के अधिकारों पर कुठाराघात करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को अकादमी की मुक्ति योजना पर तत्काल रोक लगानी चाहिए। महामंत्री तन्मय वशिष्ठ संस्कृत अकादमी धार्मिक कर्मकाण्डों का व्यवसायीकरण करना चाह रही है। जिसे कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि पुरोहितों समाज शास्त्र सम्मत विधि से सभी धार्मिक कर्म संपन्न कराते हैं। संस्कृत अकादमी की योजना किसी भी तरह से शास्त्र सम्मत नही है। सरकार को योजना पर रोक लगाकर पुरोहितों के अधिकारों को सम्मान देना चाहिए। नितिन गौतम व उज्जवल पंडित ने कहा कि पुरोहितों की शास्त्र सम्मत परंपरांओं में किसी को अतिक्रमण नहीं करने दिया जाएगा।

     प्रतिनिधि मंडल में गंगा सभा के अध्यक्ष प्रदीप झा, महामंत्री तन्मय वशिष्ठ, स्वागत मंत्री डा.सिद्धार्थ चक्रपाणि, समाज कल्याण मंत्री नितिन गौतम, प्रचार मंत्री गोपाल प्रधान, सचिव शैलेष मोहन, सचिव अवधेश पटुवर, उज्जवल पंडित, विकास प्रधान आदि शामिल रहे।

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