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मानसून सत्र के पहले ही दिन कार्यवाही ठप
Uttarakhand Herald
  • हंगामे के कारण नहीं कराया जा सका मंत्रियों का परिचय 
  • पीएम बोले पिछड़ों-दलितों और महिलाओं को मंत्री बनाना विपक्ष को नहीं आ रहा रास 
  • राजनाथ ने दिलाई परंपरा की याद कहा इससे पहले कभी नहीं हुआ ऐसा 
  • कृषि कानून, पैगासस जासूसी, महंगाई मामले में विपक्ष का हंगामा

नई दिल्ली। सोमवार को शुरू हुआ संसद का मानसून सत्र पहले ही दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया। किसान आंदोलन, पैगासस जासूसी, महंगाई के मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के कारण पीएम मोदी संसद के दोनों सदनों में नए मंत्रियों का परिचय नहीं करा पाए। परिचय कराने में नाकाम रहने के बाद पीएम ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष को बड़ी संख्या में पिछड़ों-दलितों और महिलाओं को मंत्री बनाना रास नहीं आया है।

       लोकसभा में दिवंगत पूर्व सांसदों को श्रद्घांजलि देने के बाद कांग्रेस, टीएमसी सहित कई दलोंं के सदस्यों ने वेल में आ कर हंगामा करना शुरू कर दिया। इस दौरान स्पीकर ने बार-बार परंपरा का हवाला देते हुए नए मंत्रियों का परिचय कराने देने की अपील की। हंगामे के बीच ही पीएम ने विपक्ष पर हमला बोला। पीएम ने कहा कि सदन में ऐसा पहली बार हो रहा है जब विपक्ष मंत्रियों का परिचय नहीं कराने दे रहा।

        पीएम ने कहा कि कुछ लोगों को मंत्रिमंडल में दलित-पिछड़ों, महिलाओं और किसान-गरीब वर्ग को नेतृत्व मिलने से बहुत पीड़ा हो रही है। आज इस सदन में इस वर्ग से मंत्री बने साथियों का परिचय हो रहा है। यह कौन सी महिला, दलित, आदिवासी विरोधी मानसिकता है, जिसके कारण इस सदन में विपक्ष उनका नाम भी सुनने को तैयार नहीं हैं। उनका परिचय भी कराने को तैयार नहीं हैं। दलित-आदिवासी समुदाय के मंत्रियों के प्रति ऐसा क्या रोष है यह कौन सी मानसिकता है। सदन पहली बार ऐसी परंपरा का गवाह बन रहा है।

       पीएम ने कहा कि नए मंत्रियों का स्वागत करने की सदन की परंपरा रही है। यह नेहरू के जमाने से चला आ रहा है। मैं पहली बार देख रहा हूं कि विपक्ष के सांसद मंत्रियों का परिचय कराने में बाधा डाल रहे हैं। देश के दलित, महिला, ओबीसी, किसानों के बेटे मंत्री बनें, ये बात कुछ लोगों को रास नहीं आती। गौरतलब है कि इसी महीने हुए मंत्रिमंडल विस्तार में 36 नए चेहरों को जगह मिली है।

राजनाथ और पीयूष ने भी बोला हमला
       मंत्रियों का परिचय नहीं हो पाने पर लोकसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राज्य सभा में नेता सदन पीयूष गोयल ने भी विपक्ष पर हमला बोला। राजनाथ ने कहा कि वह बीते ढाई दशक से संसद में हैं। उन्होंने कभी नहीं देखा और सुना कि विपक्ष नए मंत्रियों का परिचय कराने की परंपरा की खत्म कर दे। उन्होंने कहा कि यह स्वस्थ लोकतंत्र के लिए उचित नहंीं है। देश के संसदीय इतिहास में इससे पहले इस तरह की घटना नहीं हुई।

संसद नोटिस बोर्ड नहीं : थरूर
       हंगामे के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि कांग्रेस समेत  पूरा विपक्ष किसान आंदोलन, कोरोना कुप्रबंधन, बेरोजगारी, महंगाई सहित दूसरे मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। सरकार को भी प्रतिदिन अलग-अलग मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा के लिए तैयार होना चाहिए। हालांकि सरकार संसद को नोटिस बोर्ड की तरह इस्तेमाल करना चाहती है। हम ऐसा नहीं होने देंगे।

हंगामे के अलावा विकल्प नहीं
       आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने कहा कि देश भर के किसान कृषि कानूनों से नाराज हैं। महीनों से आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान 500 किसानों की मौत हुई है। सरकार ने इस पर कुछ नहीं कहा। इसके बाद हमारे पास हंगामा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।

गोयल नेता सदन तो नकवी को उपनेता की जिम्मेदारी
       भाजपा ने राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को नेता सदन और मुख्तार अब्बास नकवी को उप नेता की जिम्मेदारी दी है। गौरतलब है कि नेता सदन रहे थावर चंद गहलोत को कर्नाटक का राज्यपाल बनाया गया है। उस दौरान गोयल सदन में उपनेता थे। अब गोयल को थावर चंद गहलोत की जगह नया नेता सदन तो नकवी को उच्च सदन का उपनेता बनाया गया है।

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