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गोगरा-हॉट स्प्रिंग पर नहीं बनी बात, भारत-चीन के बीच 14वें दौर की वार्ता विफल
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इस बातचीत में पीपी-15 यानी हॉट स्प्रिंग से जुड़े मुद्दों का समाधान होने की उम्मीद है। पूर्वी लद्दाख में पिछले 20 महीनों से गतिरोध जारी है। कई स्थानों से भारत-चीन ने अपनी सेनाएं पीछे हटाई हैं। लेकिन कई स्थानों पर गतिरोध कायम है।

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले शेष इलाकों से गतिरोध खत्म करने के लिए बुधवार को भारत-चीन के सैन्य कमांडरों के बीच 14वें दौर की वार्ता हुई है। इसमें भारत की तरफ से हॉट स्प्रिंग, डेप्सांग और डेमचोक इलाकों में सैनिकों की पूर्ण वापसी पर जोर दिया गया। इस बीच सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे ने एक बयान में कहा कि इस बातचीत में पीपी-15 यानी हॉट स्प्रिंग से जुड़े मुद्दों का समाधान होने की उम्मीद है। पूर्वी लद्दाख में पिछले 20 महीनों से गतिरोध जारी है। कई स्थानों से भारत-चीन ने अपनी सेनाएं पीछे हटाई हैं। लेकिन कई स्थानों पर गतिरोध कायम है। पिछले साल 10 अक्टूबर को 13वें दौर की वार्ता हुई थी जो बेनतीजा रही। इसलिए इस वार्ता पर सबकी नजरें हैं। इस बीच वार्ता को लेकर सेना प्रमुख नरवणे ने कहा कि हर दौर की वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकलता है। लेकिन पूर्व में देखें तो 4-5वें दौर की वार्ता के बाद पीपी-14, नौवें एवं 10वें दौर की वार्ता के बाद पेंगोंग झील के दक्षिण एवं उत्तरी तट एवं कैलाश रेंज तथा 12वें दौर की वार्ता के बाद पीपी-17 से सैनिकों की वापसी हुई थी। इस बार भी पीपी-15 यानी हॉट स्प्रिंग क्षेत्र से मुद्दों का समाधान की उम्मीद है।

    रक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने बताया कि 14वें दौर की कोर कमांडर स्तर की वार्ता पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की ओर चुशुल-मोल्दो बैठक स्थल पर हुई। बैठक सुबह साढ़े नौ बजे तय समय पर आरंभ हुई जो देर रात तक जारी रही। बातचीत में भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्या सेनगुप्ता कर रहे हैं जिन्हें हाल ही में लेह स्थित 14वें कोर का कमांडर नियुक्त किया गया है। चीनी पक्ष का नेतृत्व दक्षिण जिंजियांग सैन्य जिले के चीफ मेजर जनरल यांग लि ने किया।

     नये दौर की यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब पूर्वी लद्दाख में पेंगोंग झील इलाकों में चीन की ओर से पुल बनाने पर भारत ने निशाना साधा था और कहा था कि यह इलाका पिछले 60 वर्षो से चीन के अवैध कब्जे में है जिसे भारत स्वीकार नहीं करता है। पिछले सप्ताह चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों का अपनी ओर से नामकरण किया था और भारत ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया था। भारत ने कहा था कि इससे इस स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ता है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है। इसके पूर्व भारत और चीन 18 नवंबर को वर्चुअल कूटनीतिक वार्ता में 14वें दौर की सैन्य वार्ता करने पर राजी हुए थे ताकि पूर्वी लद्दाख में बाकी के टकराव वाले स्थानों पर पूरी तरह से सेना को हटाने केा लक्ष्य हासिल किया जा सके।

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