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डेल्टा का स्थान लेते ओमिक्रॉन से महामारी का अंत संभव
डेल्टा का स्थान लेते ओमिक्रॉन से महामारी का अंत संभव

लेख : नरविजय यादव

 कोरोना वायरस फिर से अपना विस्तार कर रहा है। दुनिया भर के 119 देशों में फैल चुका है इसका ओमिक्रॉन वेरिएंट। विश्व में अभी तक इसके पौने तीन लाख केस सामने आये हैं। दूसरी ओर, भारत में ओमिक्रॉन से संक्रमित लोगों का आंकड़ा 780 को पार कर गया है। अच्छी बात यह है कि 115 देशों में ओमिक्रॉन की वजह से एक भी मौत नहीं हुई है। भारत में जो भी केस मिले हैं, उनमें से एक भी मरीज की हालत गंभीर नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि जनवरी माह खत्म होते होते ओमिक्रॉन दुनिया भर में डेल्टा वेरिएंट की जगह ले लेगा। आपको बता दें कि मई 2021 में दूसरी लहर लाने के पीछे डेल्टा वेरिएंट का ही हाथ था। डेल्टा इतना खतरनाक था कि इसकी वजह से बड़े पैमाने पर लोगों की जानें गयीं। डेल्टा के कारण अस्पतालों में त्राहि त्राहि मच गयी थी और आईसीयू में भी लोग बच नहीं पा रहे थे। मैं किस्मत वाला था जो 98 प्रतिशत फेफड़े संक्रमित होने के बाद भी आईसीयू से जीवित लौट आया। आज 8 माह बाद मैं पूरी तरह से स्वस्थ हूं। परंतु डेल्टा ने अपनी ओर से कसर नहीं छोड़ी थी।

       ओमिक्रॉन के बारे में खास बात यह सामने आयी है कि यह डेल्टा की तुलना में सात गुना तेजी से फैलता है। हालांकि इसकी वजह से मरीजों को अस्पतालों में भर्ती नहीं होना पड़ रहा। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के एक वैज्ञानिक के अनुसार, ओमिक्रॉन के 70 प्रतिशत मरीजों में कोई लक्षण नहीं मिले, जबकि 30 प्रतिशत मरीजों में बुखार, बदन में दर्द और गले में चुभन जैसे हल्के लक्षण मिले। अभी दिल्ली, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र राज्यों में कोरोना के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। यह रफ्तार पहली और दूसरी लहर से तेज है। यह भी संकेत मिल रहे हैं कि ओमिक्रॉन धीरे धीरे डेल्टा की जगह लेता जा रहा है। यदि यह ट्रेंड जारी रहा तो नये साल में कोविड महामारी की विदाई हो सकती है। तब यह महामारी न होकर मलेरिया, डेंगू या चिकिनगुनिया जैसी एक आम बीमारी बन जायेगी। इस बारे में इक्का दुक्का वैज्ञानिक अपनी राय जाहिर कर चुके हैं, हालांकि सरकारी या मेडिकल लेवल पर अभी इस दावे की पुष्टि नहीं की गयी है।

         ब्रिटिश मेडिकल काउंसिल के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. राम एस उपाध्याय के विचार मीडिया में सामने आये हैं। उनका कहना है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट लॉकडाउन से नहीं रुक सकता। यह डेल्टा से इस मायने में अलग है कि फेफड़ों में संक्रमण नहीं करता है। इसका विकास सांस की नली में होता है, वहीं यह अपनी संख्या तेजी से बढ़ाता है, जिससे फेफड़ों का बचाव हो जाता है। ओमिक्रॉन यदि फेफड़ों में जाता भी है तो ज्यादा नुकसान नहीं करता। इसी कारण से इसके मरीजों को अलग से ऑक्सीजन देने की जरूरत नहीं पड़ती। वैज्ञानिकों का यह भी मत है कि ओमिक्रॉन जिन लोगों को संक्रमित करेगा, उनकी नेचुरल इम्युनिटी बढ़ जायेगी। संक्रमण से मिली इम्युनिटी वैक्सीन से मिलने वाली इम्युनिटी से ज्यादा टिकाऊ होती है। यदि इस दावे में थोड़ी सी भी सच्चाई है तो यह हम सब के लिए एक अच्छी खबर है। देश में अभी भी करोड़ों लोगों को वैक्सीन नहीं लगी है। ऐसे में नेचुरल इम्युनिटी की प्रक्रिया देशवासियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगी।

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