अभिनव थापर की जनहित याचिका पर कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार को दिए निर्देश

नैनीताल। हाईकोर्ट नैनीताल में उत्तराखंड कांग्रेस के प्रवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता अभिनव थापर ने दून घाटी की अधिसूचना 1989 को केंद्र सरकार द्वारा निष्क्रिय करनें हेतु जो पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा शासनादेश दि. 13 मई 2025 के विरोध में और दून घाटी को बचाने हेतु जनहित याचिका की सुनवाई हुई और माननीय उच्च न्यायालय ने याचिका में सख्त कार्यवाही करी और केंद्र सरकार को निर्देशित किया।

जैसा की विदित है की दून घाटी अधिसूचना 1989 में 01 फरवरी 1989 को दून घाटी क्षेत्र को पर्यावरण के विषय पर संवेदनशील होने के कारण माइनिंग के सुधार हेतु सुप्रीम कोर्ट के 30 अगस्त 1988 के निर्देशानुसार दून घाटी अधिसूचना का प्रावधान किया गया था। जिससे देहरादून और उसके आसपास के क्षेत्र मसूरी, सहसपुर, डोईवाला, ऋषिकेश, विकासनगर, और इनके आस पास के इलाकों के पर्यावरण को बचाने के लिए किया गया है। किंतु राज्य सरकार के 4 जुलाई 2023 के प्रस्ताव पर पर्यावरण वन व जल वायु मंत्रालय द्वारा 21.12.2023 को दून घाटी अधिसूचना 1989 निष्क्रिय करने हेतु शासनादेश का प्रारूप और 13 मई 2025 को अंततः शासनादेश जारी किया गया जिस पर राज्य सरकार को दून घाटी में प्रतिबंधित भारी औद्योगिक गतिविधि को संचालित करने का अधिकार भी दिया गया जैसे स्लॉटर हाउस, क्रशर माइनिंग और अन्य त्म्क् ब्ंजमहवतल की औद्योगिक गतिविधि हेतु। ऋषिकेश और काशीपुर को शामिल किया गया और पर्यावरण सुधार हेतु 2021 में लगभग 68 करोड़ रुपए का बजट भी भारत सरकार द्वारा राज्य सरकार को जारी किया और देहरादून और ऋषिकेश दोनो ही पूर्णतरू दून घाटी क्षेत्र के अंतर्गत आते है और इसके उलट राज्य सरकार यहां दून घाटी अधिसूचना हटाने का कार्य कर रही है।

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