पंचायत चुनावः कई प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित कर गए प्रवासी

देहरादून। राज्य में छोटी सरकार का चुनाव संपन्न हो गया है। चुनाव आयोग और सरकार ने इन चुनावों को लेकर जो खेल तमाशा किया वह राज्य के लोग देख चुके हैं। लेकिन खेल अभी खत्म नहीं हुआ है। पहाड़ के गांव में रहने वाले लोग अब यह सोचकर परेशान है कि वह जिसे प्रधान और पंचायत सदस्य चुनना चाहते थे न तो उनके प्रत्याशी के जीतने की संभावना है न उन प्रत्याशियों के जो लंबे समय से चुनावी तैयारी में जुटे थे क्योंकि जो प्रवासी वोट डालने आए थे वह खेला करके चले गए हैं।

असल में प्रवासी गांव वासियों का अपने गांव आना और वोट डालना देखने में बहुत सुखद लगता है क्योंकि पलायन के कारण गांव उजड़ रहे हैं लेकिन इस चुनाव में दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा और चंडीगढ़ से कार और बसों में भरकर प्रवासी वोट डालने तो आए लेकिन उनके वोट से बहुत सारे प्रत्याशियों के चुनावी समीकरण गड़बड़ा दिए। उदाहरण के तौर पर पौड़ी के एक गांव में मतदाताओं की संख्या महज 30 है लेकिन प्रवासियों के मत डालने से यहां वोट पड़े हैं 150 यानी 5 गुना अधिक। ऐसे में स्थानीय प्रत्याशी की जीत तो मुश्किल है भले ही उसे गांव के सभी लोगों ने वोट दिया हो जो प्रत्याशी अपने समर्थन में वोट करने के लिए प्रवासियों को गांव तक लाया लाजमी है जीत तो अब उसी की होगी। यह एक उदाहरण भर है बहुत सारी जगह यह खेला हुआ है।

एक और समस्या अभी वह भी बरकरार है जो दो-दो मतदाता सूचियों में नाम से जुड़ी है। सैकड़ो की संख्या में ऐसे प्रत्याशी चुनाव लड़ चुके हैं जिनके नाम शहरी निकाय और गांव के मतदाता सूची में शामिल है ऐसे प्रत्याशी चुनाव जीतने के बाद भी चुनाव हार सकते हैं और उनकी सीट पर पुनः मतदान की स्थिति पैदा होगी ही। एक प्रत्याशी तो ऐसा भी है जो निकाय चुनाव में पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ चुके हैं और पंचायत का चुनाव भी लड़ रहे हैं। दो मतदाता सूचियों में नाम दर्ज कराना भले ही अपराध की श्रेणी में आता हो और इसमें एक साल की सजा का भी प्रावधान हो लेकिन इसकी उन्हें कोई परवाह नहीं है। चुनावी नतीजों के बाद उनका क्या होगा यह समय ही बताएगा।

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