युद्ध का 32वां दिन: होर्मुज़ स्ट्रेट पर ईरान का बड़ा दांव

नई दिल्ली। ईरान को लेकर जारी युद्ध में स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। एक तरफ लड़ाई लगातार जारी है, वहीं दूसरी ओर दोनों पक्षों से कूटनीति और बातचीत को लेकर अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं। युद्ध जल्द खत्म होगा या लंबा चलेगा, इसे लेकर संशय बना हुआ है।

होर्मुज़ स्ट्रेट पर ईरान की नाकाबंदी के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा, फर्टिलाइजर और अन्य आपूर्ति पर असर पड़ा है। खबर है कि ईरान की संसदीय समिति ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत जहाजों को ईरानी मुद्रा रियाल में शुल्क देना होगा और इज़राइली व अमेरिकी जहाजों को रोकने का प्रावधान भी रखा गया है, हालांकि इसे अभी कानूनी रूप नहीं मिला है।

अमेरिका और इज़राइल के हमले दूसरे महीने में पहुंच चुके हैं। अमेरिका ने हाल ही में 5000 अतिरिक्त सैनिक तैनात किए हैं और युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली को 1800 मरीन के साथ हिंद महासागर में तैनात किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज़ मार्ग खोलने के लिए 6 अप्रैल की समयसीमा तय की है, लेकिन उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि सैन्य अभियान समाप्त करने पर विचार किया जा सकता है, भले ही यह मार्ग पूरी तरह न खुले।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का मानना है कि होर्मुज़ को बलपूर्वक खोलने से संघर्ष लंबा खिंच सकता है। ऐसे में ईरान पर कूटनीतिक दबाव बनाए रखने की रणनीति अपनाई जा सकती है। साथ ही यह भी खबर है कि युद्ध की लागत का कुछ हिस्सा खाड़ी देशों से लेने पर विचार किया जा रहा है, हालांकि अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

दूसरी ओर, ईरान ने भी कहा है कि वह युद्ध का मुआवजा अमेरिका और उसके सहयोगियों से वसूल करेगा। इस बीच युद्ध के मोर्चे पर हमले जारी हैं। ईरान के इस्फहान क्षेत्र में सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की गई, जिसमें बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल हुआ। हमले के बाद बड़े विस्फोट और आग की लपटें देखी गईं।

ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में भी हमले तेज किए हैं। दुबई के पास एक बंदरगाह के नजदीक कुवैत के तेल टैंकर पर हमले से आग लग गई। वहीं इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से पर नियंत्रण की योजना का संकेत दिया है।

कुल मिलाकर, सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक प्रयास साथ-साथ चल रहे हैं, लेकिन हालात अभी भी अनिश्चित बने हुए हैं।

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