हिमाचल का बैजनाथ धाम, जहां नहीं जलता रावण का पुतला

सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही देशभर के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है। 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित बैजनाथ ज्योतिर्लिंग में भी भक्त भगवान शिव को जल अर्पित करने के लिए पहुंच रहे हैं। कई श्रद्धालु कांवड़ यात्रा के माध्यम से मंदिरों तक पहुंच रहे हैं।

हिमाचल की कांगड़ा घाटी में स्थित बैजनाथ मंदिर 800 साल से अधिक समय से आस्था, इतिहास और अद्भुत स्थापत्य का प्रतीक बना हुआ है। बारह ज्योतिर्लिंगों में शामिल यह प्रसिद्ध शिव मंदिर कांगड़ा जिले की खूबसूरत वादियों में स्थित है और भारतीय पुरातत्व विभाग इसकी देखरेख करता है।

कांगड़ा जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर बैजनाथ कस्बे में स्थित इस मंदिर के निर्माण को लेकर मान्यता है कि इसका निर्माण द्वापर युग में पांडवों ने करवाया था। बाद में दो शिव भक्तों ने वर्ष 1204 ईस्वी में इसका पुनर्निर्माण कराया। बैजनाथ मंदिर केवल एक प्राचीन शिव मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और आस्था का जीवंत प्रतीक है।

मंदिर शिखर शैली की उत्कृष्ट वास्तुकला का उदाहरण माना जाता है। पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी प्राचीन शिल्पकारों की अद्भुत कला को दर्शाती है। मंदिर परिसर में विशाल पत्थर के द्वार, प्राचीन मूर्तियां और शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराते हैं। मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर देवी-देवताओं, अप्सराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़ी सुंदर नक्काशी देखने को मिलती है।

बैजनाथ मंदिर की सबसे प्रसिद्ध कथा रावण से जुड़ी है। मान्यता है कि रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यहीं कठोर तपस्या की थी। भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया और अपने साथ ले जाने के लिए शिवलिंग प्रदान किया।

मान्यताओं के अनुसार, देवताओं की योजना के कारण रावण शिवलिंग को लंका नहीं ले जा सका और वह यहीं स्थापित हो गया। तभी से भगवान शिव यहां वैद्यनाथ के रूप में पूजे जाते हैं।

देश के अधिकांश हिस्सों में दशहरे पर रावण का पुतला दहन किया जाता है, लेकिन बैजनाथ में स्थानीय लोग रावण को भगवान शिव का महान भक्त मानते हैं। इसी श्रद्धा के कारण यहां दशहरे पर रावण का पुतला नहीं जलाया जाता। यह परंपरा बैजनाथ को देश के अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती है।

गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग के दर्शन के लिए पूरे वर्ष श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। मंदिर परिसर में स्थित नंदी की विशाल प्रतिमा भी भक्तों के आकर्षण का केंद्र है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ बैजनाथ मंदिर पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। पालमपुर, बीड़-बिलिंग, आंद्रेटा और धौलाधार पर्वत श्रृंखलाओं के नजदीक होने के कारण यहां आने वाले पर्यटक मंदिर दर्शन के साथ हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता का भी आनंद लेते हैं।

Leave a Reply