बागेश्वर। बागेश्वर जिले के कपकोट विकासखंड के पौंसारी गांव के खाईजर तोक में गुरुवार की रात बादल फटने से बड़ा हादसा हो गया। भारी भूस्खलन में दो मकान मलबे में दब गए। इस आपदा में छह लोग प्रभावित हुए, जिनमें से तीन की मौत हो चुकी है। जबकि एक बालक को सुरक्षित बचा लिया गया। शुक्रवार और शनिवार को लगातार रेस्क्यू अभियान चलाकर तीन शव निकाले गए। दो लोगों की तलाश अभी भी जारी है।
शुक्रवार को रेस्क्यू टीम ने बसंती देवी और बचुली देवी के शव बरामद किए, वहीं आज शनिवार को बड़ी मशक्कत के बाद रमेश जोशी का शव भी मलबे से निकाला गया। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। अन्य दो लोगों की खोजबीन अभी भी जारी है। आपदा प्रभावित क्षेत्र में रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान जिलाधिकारी आशीष भटगांई, पुलिस अधीक्षक चंद्र शेखर घोड़के और कपकोट विधायक सुरेश गड़िया खुद संभाले हुए हैं। बैसानी विद्यालय में बनाए गए आपदा राहत केंद्र से जिलाधिकारी और विधायक लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन व राहत कार्यों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। आपदा राहत केंद्र में आपदा प्रभावितों को रहने और भोजन की व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी आपदा के दिन से रेस्क्यू सेंटर बैसानी में बने हुए हैं वहीं से रेस्क्यू ऑपरेशन की मॉन्ट्रिंग कर रहे हैं।
कपकोट तहसील के कनलगढ़ घाटी में पौंसारी के खाईइजर में अतिवृष्टि ने यहां के लोगों को कभी न भूलने वाले जख्म दिए हैं। जिले की रेडक्रास टीम के सदस्यों ने भी आपदाग्रस्त क्षेत्र में जाकर पीड़ित परिवारों को राहत सामग्री देने के साथ ही उन्हें मदद का भरोसा दिलाया। आपदाग्रस्त गांव में क्षतिग्रस्त मकानों, खेतों और संसाधनों को याद कर ग्रामीणों की आंखें भर आ रही हैं। कई ग्रामीणों ने डर के साए में रात ही घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों में शरण ली।
पौंसारी के खाईइजर से शुरू हुई तबाही ने पूरी कनलगढ़ घाटी को अपने आवेश में लिया। क्षेत्र के लोग बताते हैं कि देर शाम से क्षेत्र में बारिश शुरू हुई रात 10 बजे से नदी-नालों का का जलस्तर बढ़ने लगा। जिससे लोग भयभीत होकर घरों से बाहर निकले। करीब साढ़े दस बजे ग्रामीणों ने एक दूसरे को आवाजें देना शुरू किया। पौंसारी गांव की ओर से भागो-भागो की आवाज आने लगी। जिसके बाद नदी नालों के किनारे बसे लोगों ने घरों को छोड़ना शुरू किया। लोगों ने अपने घरों को छोड़कर गांव में ही लोगों के घरों में शरण ली। सुबह होने के बाद क्षेत्र में बर्बादी का मंजर देख हर कोई अपनी जान बचने का शुक्र मना रहा था। लेकिन अपने आशियाने के छिन जाने का दर्द भी सहन नहीं हो पा रहा था।
आपदा में खेत, पनचक्की, तालाब और पशुधन सब बह गए। मकानों में दरारें आने से रहना भी मुश्किल हो गया है। जिला प्रशासन पीड़ितों को राहत राशि और राशन किट बांट रहा है। वहीं पीडब्ल्यूडी द्वारा मलबा हटाने और मार्ग दुरुस्त करने का काम किया जा रहा है। पैदल रास्तों को सुचारू किया जा रहा है। वहीं अन्य विभागों द्वारा क्षति का आंकलन किया जा रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों का इलाज किया जा रहा है।
