अयोध्या। अयोध्या में 27 मार्च को रामनवमी के अवसर पर एक बार फिर रामलला का दिव्य “सूर्य तिलक” होगा। यह अनोखा और अद्भुत दृश्य दोपहर ठीक 12 बजे देखने को मिलेगा, जब सूर्य की किरणें सीधे भगवान रामलला के मस्तक पर तिलक करेंगी।
राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार, यह सूर्य तिलक लगभग 4 मिनट तक रहेगा और इसे अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनीक की मदद से संभव बनाया गया है।इस खास व्यवस्था के पीछे देश के वैज्ञानिकों की बड़ी भूमिका रही है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स ने आकाशीय गतिविधियों का गहन अध्ययन किया, जिसके आधार पर सीबीआरआई रुड़की में प्रयोग किए गए। इन प्रयोगों के बाद विशेष यंत्र तैयार किया गया, जिसे ऑप्टिका ने विकसित किया। उन्होंने बताया कि यह यंत्र रिफ्लेक्शन (परावर्तन) तकनीक के जरिए सूर्य की किरणों को सीधे रामलला के ललाट तक पहुंचाता है।
खास बात यह है कि इस तकनीक का सफल परीक्षण हो चुका है और अब इसे स्थायी रूप से स्थापित कर दिया गया है। चंपत राय ने बताया गया कि यह पूरी योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचार से प्रेरित है, जिसे देश के वैज्ञानिकों ने साकार किया। अब अगले 19 वर्षों तक हर रामनवमी पर यह दिव्य और ऐतिहासिक क्षण दोहराया जाएगा।राम भक्तों के लिए यह न केवल आस्था, बल्कि विज्ञान और संस्कृति के अद्भुत संगम का प्रतीक बन चुका है।
