पिंडर घाटी को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा देने की मांग तेज

चमोली। चमोली में नारायणबगड़ की पिंडर घाटी को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा देने और संविधान की पांचवी अनुसूची में शामिल करने की मांग उठ रही है। उत्तराखंड एकता मंच ने एक गोष्ठी आयोजित कर इस मुद्दे पर चर्चा की। संविधान की पांचवीं अनुसूची जनजातीय और पिछड़े क्षेत्रों के संरक्षण, प्रशासन और उनके विकास से जुड़ी है।

गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि देश के अधिकांश हिमालयी राज्यों के मूल निवासियों को जनजातीय दर्जा प्राप्त है, लेकिन उत्तराखंड का पर्वतीय समुदाय आज भी इससे वंचित हैं। गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि जनजातीय दर्जा मिलने से युवाओं को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिलेगा। जनजातीय क्षेत्र में ग्राम सभाओं को स्थानीय संसाधनों पर अधिकार मिलते हैं। वक्ताओं के मुताबिक पर्वतीय क्षेत्र के लोगों को वनाधिकार मिलने से उनका जीवन बेहतर होगा। साथ ही जैव-विविधता का संरक्षण भी होगा। गोष्ठी में उत्तराखंड एकता मंच ने घोषणा की, कि इस मांग को जन-आंदोलन का स्वरूप दिया जाएगा।

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