रुद्रप्रयाग में रुद्रनाथ महोत्सव में गढ़वाली कवि सम्मेलन का आयोजन

रुद्रप्रयाग। रुद्रप्रयाग में शीतकालीन यात्रा उत्सव के तहत आयोजित रुद्रनाथ महोत्सव में गढ़वाली साहित्य और संस्कृति की खूबसूरत झलक देखने को मिली। गुलाबराय में चल रहे सात दिवसीय रुद्रनाथ महोत्सव के दौरान कलश साहित्य संस्था की ओर से गढ़वाली कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से पहाड़ की संस्कृति, पलायन का दर्द, बसंत ऋतु की खुशबू और समाज में बेटियों के योगदान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

कवि मुरली दीवान की कविता ’“ब्यौ का सौंष”’ को दर्शकों ने खासा पसंद किया। इस कविता में पहाड़ से हो रहे पलायन की पीड़ा और सच्चाई को भावनात्मक अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया, जिस पर दर्शकों ने तालियों के साथ खूब सराहना की। संस्था के अध्यक्ष ओम प्रकाश सेमवाल ने कहा कि गढ़वाली-कुमाऊँनी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के उद्देश्य से वर्ष 2004 में कलश साहित्य संस्था की स्थापना की गई थी। तब से लगातार गढ़वाली कवि सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। रुद्रनाथ महोत्सव में यह 366वां कवि सम्मेलन है।

कवि सम्मेलन के माध्यम से गढ़वाली भाषा और लोक संस्कृति को संरक्षित करने का संदेश भी दिया गया।

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