चमोली। चमोली जिले से है जहां पंचबद्रियों में शामिल आदिबद्री मंदिर में सदियों से आयोजित होने वाला पारंपरिक “नौठा मेला” अनूठी लोक परंपरा है, जिसे “लट्ठमार कौथिक” के नाम से जाना जाता है। इस मेले को लेकर क्षेत्र में विशेष उत्साह देखने को मिला।
आदिबद्री मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष बसंत शाह ने बताया कि यह गढ़वाल के प्राचीन और प्रसिद्ध मेलों में से एक है। मान्यता है कि पुराने समय में नए अनाज का पहला भोग आदिबद्रीनाथ भगवान को चढ़ाने की परंपरा थी। इसी को लेकर लोगों के बीच लट्ठमार की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी सांस्कृतिक विरासत के रूप में जीवित है।
