नई दिल्ली। नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और ग्लेशियर टूटने के बाद तबाही का असर 11 दिन बाद भी बना हुआ है। राहत और बचाव दल अब भी मलबे में लोगों की तलाश कर रहे हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 1,344 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 5 हजार लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान के दौरान 13 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
इस त्रासदी के बाद अब बरामद शवों की पहचान बड़ी चुनौती बनी हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, बरामद शवों में कम से कम 85 बच्चे शामिल हैं। करीब 500 शव ऐसे हैं, जिनके कुछ अंग बरामद नहीं हो सके हैं। कई शवों की हालत भी ऐसी है कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है।
चितवन जिले से सबसे ज्यादा 362 शव बरामद किए गए हैं, लेकिन इनमें से अब तक सिर्फ 98 शवों की पहचान हो सकी है और उन्हें उनके परिजनों को सौंपा गया है। शवों की पहचान में आ रही मुश्किलों को देखते हुए नेपाल पुलिस ने डीएनए सैंपलिंग शुरू कर दी है। लापता लोगों के परिजनों से डीएनए नमूने लिए जा रहे हैं, ताकि बरामद मानव अवशेषों की पहचान की जा सके।
इस बीच गोरखा जिले में रविवार तड़के एक बार फिर बाढ़ की स्थिति बनी। नम्रुंग खोला नदी के उफान में चार मकान और एक झूला पुल बह गया। हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। बाढ़ से दो छोटी पनबिजली परियोजनियों को भी नुकसान पहुंचा है।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान में भारत भी लगातार सहयोग कर रहा है। भारतीय बचाव दल नेपाल सेना के साथ मिलकर चिलिमे टनल में रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहा है। सुरंग में पानी, कीचड़ और भारी मलबा जमा होने के कारण अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
भारत अब तक सात विमानों के जरिए करीब 95 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है। इसके अलावा 54 विशेषज्ञों की टीम भी राहत और बचाव अभियान में जुटी है, जिसमें सुरंग बचाव, फॉरेंसिक और चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हैं। भारत ने नेपाल की जरूरत के अनुसार आगे भी हरसंभव सहायता जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है।
