दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने अदालतों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के उपयोग पर मसौदा जारी किया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि कोई भी न्यायिक निर्णय केवल एआई द्वारा उपलब्ध कराए गए विश्लेषण या एल्गोरिथम निर्णय लेने पर आधारित नहीं हो सकता। मसौदे पर लोगों से इस माह की 20 तारीख तक सुझाव मांगे गए हैं।
मसौदे में एआई-सहायता प्राप्त कार्यों जैसे कि केस प्रबंधन, कानूनी अनुसंधान, दस्तावेज़ सारांश, अनुवाद और प्रतिलेखन आदि की अनुमति दी गई है। हालांकि इसमें यह अनिवार्य किया गया है कि सभी न्यायिक कार्य मानव नियंत्रण में ही रहें।
प्रस्तावित ढांचा एआई को निर्णय देने, सजा तय करने, गवाहों की विश्वसनीयता का आकलन करने या कानूनी परिणामों का निर्धारण करने से रोकता है। यह बिना अनुमोदन और डेटा सुरक्षा कानूनों के अनुपालन के एआई प्रशिक्षण के लिए व्यक्तिगत डेटा के उपयोग को भी प्रतिबंधित करता है।
एआई को अपनाने पर निगरानी के लिए, मसौदे में एक त्रिस्तरीय नियामक तंत्र का प्रस्ताव है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय स्तर का प्राधिकरण, उच्च न्यायालय एआई समितियां और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर अनुसंधान और उत्कृष्टता केंद्र शामिल हैं।
